Sunday, July 19, 2009

रिश्ते

रिश्ते जन्म के साथ ही जन्म लेते हैं -
यह कोई बदन में पहने कपड़े तो नहीं -
जिन्हें खोल दे ,
या बदल डाले ,
यह ओढा हुआ दुपट्टा तो नहीं ,
जो उतार डाले ,
ना ही यह वह सिलाई है ,
जिन्हें उधाड़ डाले ,
यह तो वो सच्चाई होते हैं -
जिन्हें हम जीवन भर ढोते हैं
रिश्ते चाहें छोटे हों या बड़े ,
अगर बोझ बन जाएँ तो सहने मुश्किल हैं ,
पर मजबूरी आपकी कि सहने पड़ते हैं
जब रिश्तों में जुम्बिश ख़त्म हो जाती है ,
तो जीवन नय्या डगमगाती है ,
और हम मन ही मन एक -
नए रिश्ते की खोज में -
चल पड़ते हैं उस वीराने की ऑर -
जहाँ हमें सिर्फ़ परछाई ही दिखाई देती है ,
जो रिश्तों की अवधारणा बनती है
डूबे हुए उन रिश्तों की लाशों पर ,
एक नए रिश्ते की इमारत खड़ी होती है
हम बिना किसी परिणाम की चिंता किए ,
उस रिश्ते में मगरूर हो जाते हैं -
इस तरह जीवन चलता ही रहता है ,
अंत में जीवन रिश्तों में खो जाता है .....
रिश्तों में खो जाता है ..........................

1 Comments:

At July 20, 2009 at 12:38 AM , Blogger mehek said...

sahi hai rishtey anmol hote hai,sunder rachana

 

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