Tuesday, August 4, 2009

स्रष्टि



इस स्रष्टि में हर व्यक्ति ही अनूठा होता हैचाहे वह सच बोले चाहे वह झूठा होता है

व्यक्ति व्यक्ति से मिलकर ही -ये स्रष्टि यहाँ पर सजती है

है यह हँमारी अलग अलग द्रष्टि हर व्यक्ति पर जो बनती है

जैसी द्रष्टि होगी तेरी -वैसी ही वृष्टि बनेगी तेरी

जो रूप धरेगा नैनों में ,बन जायेगी वो कृति

तेरी नव कृति का आधार ,होती है तेरी ही द्रष्टि

तू सभंल -सभंल कर चल मानव खो न जाए कंही तेरी कृति

स्रष्टि में व्यक्ति व्यक्ति में द्रष्टि- द्रष्टि से वृष्टि ,वृष्टि से कृति बनती है

तू गलतआंकलन मत करना ,धुंधला जायेगी तेरी हर कृति

7 Comments:

At August 4, 2009 8:35 PM , Blogger श्यामल सुमन said...

दृष्टि से वृष्टि होती है बहुत अनोखी बात।
भाव जागरण का लिए रचना में जज्बात।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

 
At August 4, 2009 9:45 PM , Blogger परमजीत बाली said...

बहुत बढिया लिखा है बधाई।

 
At August 5, 2009 4:47 AM , Blogger M VERMA said...

बहुत सुन्दर
सृष्टि के सत्य से साक्षात्कार कराती रचना

 
At August 12, 2009 4:25 PM , Blogger vikram7 said...

तू सभंल -सभंल कर चल मानव खो न जाए कंही तेरी कृति

स्रष्टि में व्यक्ति व्यक्ति में द्रष्टि- द्रष्टि से वृष्टि ,वृष्टि से कृति बनती है
अति बेहतरीन भाव किये सुन्दर रचना

 
At August 12, 2009 6:29 PM , Blogger amlendu asthana said...

Apke prakriti prem aur Manav perm ka sajhidar her koi ho jaye to samaj sunder ho jaye. Apka prayas sarahniye hai. Ek anurodh hai, agar ho sake to apne shahar ki kuch waisi sansthan ki jankari dengi jo Mand Bhdhi aur Autistic bachchon ke lye sanjidgi se kam ker rahe hain.

 
At August 14, 2009 5:55 PM , Blogger amlendu asthana said...

आपको जनमाष्टमी और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं।

 
At August 14, 2009 9:33 PM , Blogger kalaam-e-sajal said...

जो रूप धरेगा नैनों में ,बन जायेगी वो कृति

Khoobsoorat pankti. Apnaa ek puraana sher yaad aa gayaa:

उड़ता बादल हूँ कोई रूप न चेहरा है कोई
जो भी चाहोगे वही शक्ल दिखाई देगी।

 

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