Thursday, September 24, 2009

क्यूँ नहीं किया

रूप का साक्षात्कार क्यूँ नहीं तुमने किया ,
दर्द का इक अहसास क्यूँ नहीं तुमने किया ,
शम्मा की तरह जलती रहीं तुम रात भर ,
क्यूँ नहीं परवाने से प्यार है तुमने किया
गर्दिशे जब भी पडी हाथ थामा है उसी का ,
आज जन्नत की राह में याद क्यूँ न उसको किया ,
थी सजी महफ़िल तुम्हारी इश्क का दामन लिए ,
क्यूँ रही रूठी यहाँ यूं -इकरार न उससे किया
आज क्यूँ यूं रो रही हो वक्त के चुक जाने पर ,
प्यार लेकर जब बढ़ा वो ,एतवार क्यूँ न किया
थक गए ये चाँद सूरज ,थक गई है रौशनी ,
महफिलें जब सज रहीं थी -इस्तकबाल क्यूँ न किया

6 Comments:

At September 24, 2009 at 11:18 AM , Blogger Mithilesh dubey said...

वाह, बहुत बढिया रचना,।

 
At September 24, 2009 at 12:02 PM , Blogger Pankaj Mishra said...

सही प्रशन है क्यों नहीं किया

 
At September 24, 2009 at 12:33 PM , Blogger नीरज गोस्वामी said...

बहुत सुन्दर रचना...लिखती रहें...
नीरज

 
At September 24, 2009 at 12:54 PM , Blogger M VERMA said...

बढिया रचना, सुन्दर्

 
At October 6, 2009 at 12:22 PM , Blogger शुभम जैन said...

bahut sundar rachna....


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At October 18, 2009 at 6:55 PM , Blogger vikram7 said...

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

 

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