Tuesday, October 20, 2009

दीप जलाओ इस तरह

अंधकार को भगाओ कुछ यूं दीप जलाकर
कि धरा जगमगा उठे -मुस्कराकर
रोशनी इतनी करो आकाश तक -
कि पंछी ,तारे चाँद सब उतरे धरा पर ,
अंधकार मन का हटा दो ,ज्ञानदीप जलाकर -
खिल उठे मानव मन प्यार से मुस्कराकर ,
दीप सिर्फ़ एक घर पर मत जलाओ -
बाँट दो दीप प्यार का हर कोने में धरा पर ,
विश्व के किसी कोने में गर अँधेरा रह जाएगा -
तो दीप जलाने वाले का ख्वाब अधूरा रह जाएगा ,
इसलिए एक दीप जला शहीदों की मजारों पर ,
गरीबों की बस्तियों पर -उदासी की राहों पर ,
गर तूने प्रकाश फैला दिया विश्व के मानस पटल पर -
देखना तेरा घर ख़ुद ही रोशन हो जाएगा
सभी को दीपावली की शुभ कामनाएं ----
कुछ ऐसे कारण रहे कि ब्लॉग से संपर्क न बना सकी सभी को बहुत मिस किया पर अब लगातार संपर्क में रहूँगी
इसी उम्मीद के साथ -----आप सभी को एक बार फ़िर दीपावली की शुभ कामनाएं -----

2 Comments:

At October 20, 2009 at 10:16 PM , Blogger MANOJ KUMAR said...

आपकी चेष्टाएं झिलमिला उठीं हैं।

 
At October 20, 2009 at 11:12 PM , Blogger संगीता पुरी said...

दीप जलाओ इस तरह .. अच्‍छा लिखा !!

 

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